बवासीर / पाइल्स एवं होम्योपैथी

आजकल बवासीर एक बहुत ही आम बीमारी होती जा रही है। इसका एक बड़ा कारण है कि इस बीमारी से ग्रसित लोग इसे गुप्त भी मानते हैं और शर्म के मारे इसके बारे में खुलकर बात नहीं कर पाते हैं जिसके कारण उपचार में समय पर देरी हो जाती है। इसके अलावा गलत खानपान एवं असमय भोजन बहुत ही घातक साबित होते हैं। इसलिए लोगों को हमेशा यह नहीं सोचना चाहिए कि ये मात्र कब्जियत या गैस की समस्या है बल्कि यह गंभीर भी हो सकती है। तो आइए जानते हैं बवासीर के कारणों में विशेष रूप से एक कारण का एवं इसके लक्षणों के बारे में।

बवासीर में मलाशय की शिराएं फूल जाती हैं। व इनमें खून जमा हो जाता है और इनमें से खून निकलने लगता है। इस स्थिति में दर्द व खुजली भी हो सकती है।

लक्षण :

  • जब लक्षण सामान्य उदर, उदरस्थ उदरस्थ।
  • शौच के समय दर्द आना।
  • गुदा स्थान पर गाँठ सूज जाना व बाहर आना।
  • मल में खून आना।
  • जब आंतरिक बवासीर बढ़ जाए तो शौच के समय खून आना (स्प्लैशिंग) होता है, इसके लक्षण हैं — जलन, रक्तस्राव, दर्द, शौच के बाद भी शौच का एहसास बना रहना।

कारण :

  • भोजन में रेशे का अभाव उदरस्थ उदरस्थ।
  • भोजन में मसाले का अत्यधिक प्रयोग उदरस्थ उदरस्थ।
  • भोजन के साथ पानी कम पीना उदरस्थ उदरस्थ।
  • भोजन के तुरंत बाद पानी पीना।
  • लंबे समय तक बैठे रहना, कब्ज, मोटापा, गर्भावस्था इत्यादि।
  • डायरीया (पतले दस्त) होने पर भी बवासीर के लक्षण उत्पन्न होते हैं।
  • गुदा के आसपास की मांसपेशियों का कमजोर होना।
  • शरीर में पानी की कमी होने पर कब्ज हो जाता है जिससे बवासीर की समस्या (कब्जियत-constipation) उत्पन्न होती है।

प्रायः बवासीर रोगी का एक मात्र प्रयास यह रहता है कि, मलाशय (गुदा द्वार) से खून का आना रुका रहे और इसके लिए वह अपना इलाज बिना चिकित्सक की राय लिए, घरेलू उपचार व इधर उधर भटक कर रोग को जीर्णावस्था तक ले जाता है।

होम्योपैथी में बवासीर का बहुत ही असरदार (बिना ऑपरेशन) इलाज सम्भव है। इलाज शुरू करने के सप्ताह भर में ही पुराने से पुराने बवासीर के रोगी का दर्द, जलन व खून गिरना समाप्त हो जाता है।। यदि इसमें रोगी 3–4 महीने तक लगातार दवाई ले तो यह बिना ऑपरेशन के जड़ मूल से समाप्त हो जाती है।

डैफोडिल पाली क्लिनिक
डा. राजन सिंह मूद
MOB : 7728930767

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